कानपुर के चर्चित दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड मामले में शनिवार को एसीजेएम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले में जेल में बंद बहू शालू, सुपारी किलर विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर को अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान शालू ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत में स्पष्ट किया कि उसने आरोपियों को फ्लैट की चाबी नहीं दी थी और न ही ऐसी कोई चाबी बनवाई थी।
उल्लेखनीय है कि 5 सितंबर की रात को रतन ऑर्बिट स्थित सी-104 फ्लैट में कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या कर दी गई थी। उनके गले और सीने पर 26 से ज्यादा बार धारदार हथियार से प्रहार किया गया था। पुलिस के अनुसार, इस वारदात में पूर्व नौकर विशाल गौतम और राजकिशोर को 6 सितंबर की शाम मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के दौरान विशाल ने शालू पर आरोप लगाया था कि फ्लैट की चाबी उसी ने उपलब्ध कराई थी।
शनिवार को पुलिस ने कोर्ट में तीनों आरोपियों का पुलिस कस्टडी रिमांड (पीसीआर) मांगा था। पुलिस का तर्क था कि शालू से फ्लैट की डुप्लीकेट चाबी बरामद करनी है और अन्य आरोपियों से पूछताछ आवश्यक है। हालांकि, शालू के अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने पुलिस के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पुलिस ने मनगढ़ंत बयान तैयार किए हैं। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि शालू सच बताने के लिए तैयार है और अपना कलमबंद बयान दर्ज कराना चाहती है।
लगभग एक घंटे तक चली तीखी बहस के बाद न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पीसीआर पर अगली सुनवाई के लिए 22 तारीख तय की है। इस दौरान शालू के परिवार के सदस्य भी अदालत परिसर में मौजूद थे। कोर्ट ने सभी आरोपियों को वापस जेल भेजने का आदेश दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब अगली पेशी पर कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।