साल 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस और SP ने साथ मिलकर मैदान में उतरने का ऐलान तो कर दिया है, लेकिन गठबंधन की राह में सीट बंटवारे का मसला बड़ी बाधा बनकर उभर रहा है। दोनों दलों के बीच गठबंधन की सहमति तो है, लेकिन सीटों की संख्या और बातचीत के समय को लेकर मतभेद साफ नजर आ रहे हैं। जहां कांग्रेस चाहती है कि सीट बंटवारे पर जल्द से जल्द समझौता हो जाए, वहीं SP इस मामले में कोई जल्दबाजी दिखाने के मूड में नहीं है।
दोनों पार्टियां अपनी सौदेबाजी की ताकत को मजबूत करने में जुटी हैं। कांग्रेस के भीतर एक धड़ा चाहता है कि गठबंधन जल्द तय हो ताकि उसे पता चल सके कि उसे कितनी और कौन सी सीटों पर चुनाव लड़ना है। कांग्रेस का तर्क है कि देरी से उसकी मोलभाव करने की क्षमता कमजोर होगी। दूसरी तरफ, पार्टी का कहना है कि इस बार वह अपनी शर्तें खुद तय करेगी और पिछली बार की तरह SP को सीटों का फैसला नहीं करने देगी। वहीं, SP अपनी तैयारियों को लेकर स्पष्ट है और उसका मानना है कि वह जरूरत पड़ने पर सभी 403 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने में भी सक्षम है।
दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने दावा किया है कि उनकी पार्टी ने SP को 150 से अधिक सीटों की सूची सौंपी है, हालांकि SP की ओर से गठबंधन पर अभी कोई औपचारिक बातचीत की पुष्टि नहीं की गई है। जमीनी हकीकत यह है कि दोनों दल जानते हैं कि बिना साथ आए उनका चुनावी प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है, क्योंकि SP की पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पकड़ सीमित है, तो कांग्रेस का संगठनात्मक आधार प्रदेश में बहुत कमजोर है। अभी तक गठबंधन को लेकर केवल अनौपचारिक संकेत ही मिले हैं। दोनों पार्टियां अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए दबाव की राजनीति कर रही हैं। यह देखना अहम होगा कि क्या वे आसानी से किसी समझौते पर पहुंच पाएंगे या फिर यह गठबंधन सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेगा।