उत्तर प्रदेश अब देश के प्रमुख वस्त्र केंद्रों में शुमार हो गया है। राज्य के वस्त्र, परिधान और हस्तशिल्प निर्यात में वित्त वर्ष FY26 के दौरान 10 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे यह आंकड़ा करीब 35,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इससे पहले FY25 में यह निर्यात 31,804 करोड़ रुपये से अधिक था। राज्य की औद्योगिक क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह भारत में कपड़ों का तीसरा सबसे बड़ा निर्माता है और घरेलू उत्पादन में करीब 13 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है।
इस उद्योग की विशालता का अंदाजा रोजगार के आंकड़ों से भी मिलता है, जहां 1.5 मिलियन लोग काम कर रहे हैं। राज्य में 200,000 हथकरघा बुनकर और 500,000 पावरलूम बुनकर सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। लखनऊ में आयोजित हालिया UP टेक्सटाइल कॉन्क्लेव 2026 में 5,196 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों के लिए MoU साइन किए गए। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने राज्य को वैश्विक वस्त्र केंद्र बनाने का विजन रखा। उनका जोर फाइबर से लेकर ब्रांड तक की पूरी वैल्यू चेन विकसित करने पर है, ताकि उत्पादों को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंचाया जा सके।
उत्तर प्रदेश का कालीन उत्पादन में दबदबा कायम है, जो देश के कुल उत्पादन का 90 प्रतिशत है। निर्यात के मामले में गौतम बुद्ध नगर जिला भी चमक रहा है, जिसने FY26 में 21,000 करोड़ रुपये का निर्यात किया और देश के प्रमुख निर्यातक जिलों में दूसरे स्थान पर रहा। साथ ही, राज्य के 17 वस्त्र उत्पादों को GI टैग मिल चुका है, जो उनकी विशिष्ट गुणवत्ता और पारंपरिक निर्माण विधियों को प्रमाणित करता है। अब सरकार पारंपरिक वस्त्रों के साथ-साथ रक्षा, स्वास्थ्य और खेल जैसे क्षेत्रों के लिए तकनीकी वस्त्रों पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। वाराणसी, अमरोहा, बरेली, संत कबीर नगर और बिजनौर जैसे जिलों में वस्त्र परियोजनाओं के लिए जमीन की पहचान की जा चुकी है, जबकि अन्य स्थानों पर भी काम तेजी से जारी है।