लखनऊ की प्रमुख आवासीय कॉलोनी राजाजीपुरम में अब एक नई मांग जोर पकड़ रही है। स्थानीय निवासियों ने भारत रत्न चक्रवर्ती राजगोपालाचारी की स्मृति में क्षेत्र के किसी मुख्य चौराहे या पार्क में उनकी प्रतिमा स्थापित करने की अपील की है। इस संबंध में स्थानीय लोगों ने एक बैठक की, जिसमें मुख्यमंत्री, सांसद और नगर विकास मंत्री से इस मांग को गंभीरता से लेने का आग्रह किया गया। बैठक में बड़ी संख्या में स्थानीय प्रबुद्ध जन शामिल हुए।
निवासियों का कहना है कि राजाजीपुरम कॉलोनी का नाम देश के महान स्वतंत्रता सेनानी और राजनेता चक्रवर्ती राजगोपालाचारी के नाम पर रखा गया है, लेकिन विडंबना यह है कि इस क्षेत्र में उनके योगदान को दर्शाने वाला कोई स्मारक या प्रतिमा मौजूद नहीं है। स्थानीय लोगों का मानना है कि किसी प्रमुख सार्वजनिक स्थान पर उनकी प्रतिमा स्थापित होने से युवाओं को उनके आदर्शों और राष्ट्र सेवा के योगदान को जानने का मौका मिलेगा।
राजाजीपुरम का इतिहास और महत्व अपने आप में खास है। यह कॉलोनी अपने शुरुआती दौर में एशिया की सबसे बड़ी कॉलोनियों में शुमार रही है। करीब 15.93 वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र में 40 हजार से अधिक मकान हैं, जो इसे लखनऊ की सबसे घनी और प्रमुख कॉलोनियों में से एक बनाता है।
चक्रवर्ती राजगोपालाचारी का व्यक्तित्व बहुआयामी था। वे स्वतंत्र भारत के पहले और अंतिम भारतीय गवर्नर जनरल रहे। उन्होंने असहयोग आंदोलन, नमक सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई थी। महात्मा गांधी के करीबी रहे राजगोपालाचारी न केवल एक कुशल प्रशासक थे, बल्कि एक प्रखर साहित्यकार भी थे, जिन्होंने रामायण और महाभारत का तमिल और अंग्रेजी में अनुवाद किया था। देश के प्रति उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें 1954 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। निवासियों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी इस मांग को स्वीकार करेगा, जिससे कॉलोनी की पहचान और भी गौरवशाली हो सकेगी।