नेपाल में आई आपदा के बाद उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में बाढ़ का संकट गहरा गया है। नेपाल के तराई क्षेत्रों और स्थानीय स्तर पर हो रही लगातार बारिश के कारण वाल्मीकिनगर गंडक बैराज से छोड़े जाने वाले पानी की मात्रा में तेजी से इजाफा हो रहा है। बाढ़ नियंत्रण कक्ष के आंकड़ों के अनुसार, बुधवार सुबह 8 बजे बैराज से 1.39 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया था, जो शाम 4 बजे तक बढ़कर 1.83 लाख क्यूसेक के स्तर पर पहुंच गया। इस अचानक हुई 44 हजार क्यूसेक की बढ़ोतरी ने नदी के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
जलस्तर में इस उछाल का सीधा असर नदी की स्थिति पर पड़ा है। अपस्ट्रीम का जलस्तर 108.11 मीटर से बढ़कर 110.34 मीटर दर्ज किया गया है, जो खतरे के स्तर 109.670 मीटर से ऊपर है। वहीं, डाउनस्ट्रीम का जलस्तर भी 107.35 मीटर से बढ़कर 107.84 मीटर हो गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सिंचाई विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। सिंचाई खंड द्वितीय के अधिशासी अभियंता ने विभागीय टीम को 24 घंटे नदी पर कड़ी निगरानी रखने के सख्त निर्देश दिए हैं।
दूसरी ओर, नेपाल में आई तबाही और वहां के मुख्य राजमार्गों के क्षतिग्रस्त होने का असर सीमावर्ती इलाकों में भी साफ दिख रहा है। ठूठीबारी, सोनौली, नौतनवा और निचलौल समेत कई सीमावर्ती कस्बों के निवासियों का अपने नेपाल में रहने वाले रिश्तेदारों से संपर्क पूरी तरह कट गया है। सड़कों के टूटने और नेटवर्क सेवा ध्वस्त होने के कारण लोग अपनों की सुरक्षा को लेकर खासे परेशान हैं। सोनौली सीमा पर जहां मालवाहकों की आवाजाही प्रभावित हुई है, वहीं स्थानीय लोग नेपाल से आने वाले यात्रियों से वहां के हालात जानने की कोशिश कर रहे हैं। आपदा की इस घड़ी में सीमावर्ती गांवों में लोग बेचैनी के बीच दिन काट रहे हैं और बेसब्री से सामान्य स्थिति बहाल होने का इंतजार कर रहे हैं।