लखनऊ विश्वविद्यालय ने अपने चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रमों में छात्रों के लिए करियर के नए रास्ते खोल दिए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अंतर्गत विश्वविद्यालय ने पाठ्यक्रम में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिसके तहत अब चौथे वर्ष में विद्यार्थियों को शोध, उद्यमिता और ऑनर्स में से अपनी पसंद का विकल्प चुनने की सुविधा मिलेगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य छात्रों को उनकी व्यक्तिगत रुचि और योग्यता के अनुसार शिक्षा प्रदान करना है।
पूर्व में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के तहत केवल 'यूजी ऑनर्स विद रिसर्च' का ही विकल्प उपलब्ध था, जिसके लिए 7.5 CGPA की अनिवार्यता थी। इस कठिन शर्त के कारण कई छात्र चौथा वर्ष पूरा करने से वंचित रह जाते थे। अब विश्वविद्यालय ने इस बाध्यता को समाप्त कर दिया है, जिससे 7.5 से कम CGPA प्राप्त करने वाले विद्यार्थी भी 160 क्रेडिट का चार वर्षीय स्नातक कोर्स पूरा कर सकेंगे।
नए बदलावों के अनुसार, 'यूजी ऑनर्स विद रिसर्च' के लिए छात्रों को पहले छह सेमेस्टर में न्यूनतम 7.5 CGPA बनाए रखना होगा और 12 क्रेडिट का रिसर्च प्रोजेक्ट पूरा करना अनिवार्य होगा। वहीं, 'यूजी ऑनर्स विद उद्यमिता' का विकल्प उन सभी छात्रों के लिए खुला है जिन्होंने छह सेमेस्टर सफलतापूर्वक पूरे किए हैं। इसमें छात्रों को 12 क्रेडिट का औद्योगिक प्रशिक्षण (इंडस्ट्रियल एक्सपोजर) लेना होगा। इसके अलावा, सामान्य 'यूजी ऑनर्स' विकल्प में पात्र विद्यार्थियों को 12 क्रेडिट के उन्नत पाठ्यक्रम पढ़ाए जाएंगे।
इन नई शैक्षणिक व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से लागू करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने सात सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। प्रो. मुनका खन्ना की अध्यक्षता वाली यह समिति क्रेडिट संरचना, उद्योग जगत के साथ तालमेल और आगामी कार्ययोजना के लिए दिशा-निर्देश तैयार करेगी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी ने इस निर्णय को छात्रों के शैक्षणिक भविष्य के लिए एक बड़ा कदम बताया है, जिससे अब अधिक संख्या में विद्यार्थी अपनी दक्षता के अनुरूप उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।