उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की नजूल संपत्तियों को लेकर नई व्यवस्था बनाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन संपत्तियों का नए सिरे से विस्तृत सर्वे कराने का बड़ा आदेश दिया है। इस कवायद का मुख्य उद्देश्य नजूल भूमि के प्रबंधन और उपयोग में पूरी पारदर्शिता लाना है ताकि किसी भी स्तर पर कोई गड़बड़ी न हो।
हाल ही में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में विधान परिषद की प्रवर समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। इसमें नजूल संपत्तियों से जुड़े तमाम पहलुओं पर मंथन किया गया। राज्य सरकार चाहती है कि इन संपत्तियों का एक स्पष्ट और विस्तृत विवरण तैयार हो, जिसमें यह साफ हो कि कुल कितनी नजूल संपत्तियां हैं, कितनी फ्री-होल्ड की जा चुकी हैं और कितनी संपत्तियों पर अवैध कब्जा है। इसके अलावा, न्यायालयों में चल रहे लंबित मामलों की स्थिति पर भी रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
यह सारा डाटा और सर्वे रिपोर्ट प्रवर समिति की आगामी बैठक में रखी जाएगी, ताकि 'उत्तर प्रदेश नजूल संपत्ति (लोक प्रयोजनार्थ प्रबंध और उपयोग) विधेयक 2024' को विधान परिषद से पारित कराने का मार्ग प्रशस्त हो सके। गौरतलब है कि यह विधेयक वर्ष 2024 में विधानसभा से तो पास हो चुका है, लेकिन विधान परिषद में इसे समिति के पास भेजा गया था।
बैठक में समिति के सदस्यों ने विभिन्न धाराओं में संशोधन का सुझाव भी दिया है। इसमें पट्टेदारों के हितों की सुरक्षा, गरीबों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के अधिकारों के साथ-साथ सरकारी भूमि की सुरक्षा और भविष्य में आवंटन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। चर्चा के दौरान बेदखली, मुआवजे, पुनर्वास और अधिकारियों के विवेकाधीन अधिकारों जैसे संवेदनशील विषयों को भी उठाया गया।
प्रवर समिति की अगली बैठक में जिलेवार और तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। माना जा रहा है कि इस व्यापक सर्वे और नीति के बाद प्रदेश में नजूल भूमि को लेकर लंबे समय से चली आ रही जटिलताओं का समाधान निकल सकेगा और सरकारी संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित हो पाएगा।