उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगवाने के बाद भी हजारों बिजली उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य में बिजली सेवाओं को आधुनिक और ऑनलाइन बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस परियोजना के तहत अब तक 96.88 लाख मीटर लगाए जा चुके हैं, लेकिन बड़ी संख्या में मीटरों के नेटवर्क में न जुड़ पाने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
आंकड़ों पर गौर करें तो प्रदेश में 87,833 स्मार्ट मीटर संचार के दायरे से पूरी तरह बाहर हैं। इनमें से 42,947 मीटर ऐसे हैं जो पहली बार लगने के बाद से कभी नेटवर्क में आए ही नहीं। इस तकनीकी खामी के कारण उपभोक्ताओं को ऑनलाइन बिजली बिलिंग और अन्य डिजिटल सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। नेटवर्क से कटाव होने के चलते कई क्षेत्रों में उपभोक्ताओं के बिल अपडेट नहीं हो रहे हैं, जिससे उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
क्षेत्रवार स्थिति देखें तो कानपुर-झांसी-बांदा क्षेत्र में 3.69 प्रतिशत स्मार्ट मीटर नेटवर्क से बाहर हैं, जबकि कानपुर शहर में यह आंकड़ा 3.97 प्रतिशत दर्ज किया गया है। वहीं गोरखपुर-बस्ती क्षेत्र में 2.73 प्रतिशत मीटर संपर्क में नहीं हैं। परियोजना के इस खराब प्रदर्शन को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष और राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सरकार से पूरी परियोजना की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी गुणवत्ता और तकनीकी नेटवर्क में इतनी बड़ी खामियां स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने मांग की है कि इस अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार कार्यदायी कंपनियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए और भविष्य के लिए इस पूरी योजना की गंभीरता से समीक्षा आवश्यक है।