अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट को मिले दान में कथित अनियमितताओं के मामले पर मुख्यमंत्री ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए सरकार ने SIT का गठन किया है और जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी तरह के आधारहीन बयानों से बचना चाहिए। अयोध्या में 126 विकास परियोजनाओं के शिलान्यास और उद्घाटन के बाद उन्होंने कहा कि 15 दिनों तक धैर्य रखना आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि SIT का काम सच और झूठ के बीच का अंतर स्पष्ट करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर के लिए ट्रस्ट ने स्वयं जांच का आग्रह किया था। उन्होंने राम भक्तों से अपील की कि वे ऐसे लोगों के बहकावे में न आएं जो अयोध्या की छवि धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने पूर्वजों के 500 वर्षों के संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग पहले राम भक्तों पर गोलियां चलाते थे और मंदिर निर्माण में बाधा डालते थे, उन्हें अब उपदेश नहीं देना चाहिए। उन्होंने एक विपक्षी नेता का नाम लिए बिना कहा कि वे राम मंदिर नहीं गए और अब मंदिर को बदनाम करने के लिए भ्रामक बातें कर रहे हैं।
इस मामले में AAP के एक सांसद ने ट्रस्ट के महासचिव पर धोखाधड़ी का आरोप लगाते हुए कहा कि 117 बिस्वा जमीन 9 करोड़ रुपये के बजाय 55 करोड़ 47 लाख रुपये में खरीदी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट द्वारा जमीन 47 लाख रुपये प्रति बिस्वा की दर से खरीदी गई, जबकि अन्य जगहों पर यह काफी सस्ती थी। इन आरोपों के बीच मुख्यमंत्री ने लोगों से आह्वान किया कि वे तब तक कोई बयान न दें जब तक SIT की जांच पूरी न हो जाए, क्योंकि इससे जांच प्रभावित हो सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने के बाद कोई भी अपनी बात रख सकता है।