उत्तर प्रदेश में परिवहन बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक नई पहल की है। इसके तहत निजी कंपनियों द्वारा 1,100 करोड़ रुपये का निवेश किए जाने की संभावना है, जिसका उपयोग 18 आधुनिक बस टर्मिनल विकसित करने में किया जाएगा। यह कदम राज्य में PPP मॉडल के विस्तार और इलेक्ट्रिक बस नेटवर्क को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) ने इसके लिए निविदाएं भी आमंत्रित की हैं। ये नए बस अड्डे अममेठी, पीलीभीत, गोंडा, बलरामपुर और उन्नाव जैसे क्षेत्रों में बनाए जाएंगे। इन स्टेशनों पर यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी, साथ ही ये स्थानीय स्तर पर आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी गति प्रदान करेंगे। राज्य सरकार पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को लगातार बढ़ावा दे रही है। वर्तमान में 43 जिलों में इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं और भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाकर सभी 75 जिलों तक करने की योजना है। इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ माना जा रहा है। इसके अलावा, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए बस डिपो, बस स्टेशनों और पेट्रोल पंपों पर काम चल रहा है। सुरक्षा की दृष्टि से भी परिवहन निगम विशेष सतर्कता बरत रहा है, जिसके तहत हर बस में GPS ट्रैकिंग और पैनिक बटन की सुविधा सुनिश्चित की गई है। मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के अंतर्गत राज्य का लक्ष्य 12,200 गांवों को ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालयों से नियमित बस सेवाओं के माध्यम से जोड़ना है। वर्तमान में लगभग 1,100 बसें इस योजना का हिस्सा हैं, जिन्हें भविष्य में 10,000 बसों तक विस्तार देने का लक्ष्य है। इस पूरी योजना के लिए 90 वर्षों तक की रियायती अवधि तय की गई है, जिसमें परिवहन के अलावा अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों जैसे रिटेल, होटल और ऑफिस स्पेस का भी प्रावधान है, जो इसे और अधिक व्यवहार्य बनाता है।