सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में एक पुरानी संरचना के मिलने के बाद पुरातत्व विभाग यानी ASI की टीम ने मौके पर पहुंचकर मुआयना किया है। मलबे के नीचे दबी मिली यह संरचना करीब 20 फुट गहरी और 1.5 मीटर चौड़ी है। रविवार को सफाई कार्य के दौरान इस संरचना के सामने आने के बाद से ही इसके ऐतिहासिक महत्व को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
ASI की टीम ने सोमवार को घटनास्थल का दौरा किया और सीढ़ी के जरिए नीचे उतरकर स्थिति का प्रारंभिक जायजा लिया। इस निरीक्षण के बाद ASI अधिकारी मनोज कुमार यादव ने बताया कि प्राथमिक जांच में यह संरचना करीब 200 से 300 साल पुरानी प्रतीत हो रही है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि यह एक कुआं ही है या नहीं। इसके वास्तविक स्वरूप और इतिहास की सटीक जानकारी केवल खुदाई के बाद ही मिल सकेगी। इस संरचना का काल संभवतः मध्यकाल के बाद का माना जा रहा है।
यह स्थान उस मस्जिद के परिसर में था, जिसे 5 सितंबर को जिला अदालत के एक आदेश के बाद गिराया गया था। जिला जज सतेन्द्र कुमार ने 2 सितंबर को मस्जिद समिति की अपील खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने सिटी मजिस्ट्रेट के 16 जुलाई 2026 के आदेश को बरकरार रखा था। इस आदेश में विवादित भूमि को सरकारी संपत्ति माना गया था। इसके बाद प्रशासन ने रात में कार्रवाई करते हुए उस हिस्से को हटाने का काम शुरू किया था जिसे सरकारी जमीन पर बना हुआ माना जा रहा था।
स्थानीय प्रशासन का कहना है कि भविष्य में खुदाई की अनुमति मिलने पर ही इस प्राचीन संरचना का रहस्य पूरी तरह से सामने आ पाएगा। फिलहाल, प्रशासन ने संरचना की उम्र और स्वरूप से संबंधित जानकारी जुटाई है। उधर, इस मामले में पूर्व में एक याचिका 2025 में दायर की गई थी, जिसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने ढांचे को अवैध घोषित कर दिया था। इस पूरी घटनाक्रम के दौरान मौके पर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है।