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उत्तर प्रदेश ने ग्रामीण विद्युतीकरण में रचा कीर्तिमान, 91.8 लाख घरों तक पहुंची बिजली

🗺️ उत्तर प्रदेश 📅 8 सितम्बर 2026 · By BolHind Bureau
उत्तर प्रदेश ने ग्रामीण विद्युतीकरण में रचा कीर्तिमान, 91.8 लाख घरों तक पहुंची बिजली
Photo: BolHindAI Team द्वारा निर्मित

भारत में ग्रामीण क्षेत्रों के अंतिम छोर तक बिजली पहुंचाने के मिशन में उत्तर प्रदेश ने अग्रणी भूमिका निभाई है। केंद्र सरकार की सौभाग्य योजना के अंतर्गत राज्य ने सर्वाधिक विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल करते हुए पूरे देश में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। यह योजना उन परिवारों के लिए वरदान साबित हुई जो अब तक बिजली नेटवर्क से पूरी तरह बाहर थे। प्रधानमंत्री सहज बिजली हर घर योजना, जिसे सौभाग्य के नाम से जाना जाता है, का शुभारंभ 25 सितंबर 2017 को हुआ था। इसका मुख्य उद्देश्य केवल गांवों तक बिजली पहुंचाना नहीं, बल्कि हर घर के दरवाजे तक रोशनी सुनिश्चित करना था। इस कार्यक्रम के लिए शुरुआती लक्ष्य दिसंबर 2018 तय किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर मार्च 2019 कर दिया गया। सौभाग्य योजना के माध्यम से 16,320 करोड़ के बजट के साथ गरीब और ग्रामीण परिवारों को मुफ्त बिजली कनेक्शन प्रदान किए गए। योजना में LED बल्ब, ऊर्जा मीटर, सर्विस केबल और वायरिंग जैसी मूलभूत सुविधाएं शामिल थीं। जिन परिवारों को मुफ्त कनेक्शन नहीं मिल सका, उनके लिए 500 के शुल्क का प्रावधान किया गया, जिसे किस्तों में बिजली बिल के माध्यम से वसूला जा सकता था। साल 2022 में जब 31 मार्च को यह योजना औपचारिक रूप से समाप्त हुई, तब तक पूरे देश में 2.86 करोड़ परिवारों को विद्युतीकृत किया जा चुका था। इस विशाल आंकड़े में उत्तर प्रदेश का योगदान सबसे महत्वपूर्ण रहा। राज्य ने 91.8 लाख परिवारों को बिजली कनेक्शन दिए, जो कि अन्य राज्यों की तुलना में कहीं अधिक है। बिहार में यह संख्या 32.6 लाख, ओडिशा में 24.5 लाख और असम में 23.3 लाख रही। योजना के दौरान सात राज्यों ने, जिनमें उत्तर प्रदेश भी शामिल था, उन परिवारों को भी चिन्हित किया जिन्होंने शुरुआत में कनेक्शन लेने से मना कर दिया था। इन अतिरिक्त प्रयासों से 18-19 लाख और घरों को जोड़ा गया। 2011 की जनगणना के आधार पर पहचाने गए गरीब परिवारों को प्राथमिकता देते हुए, इस योजना ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत में विद्युतीकरण की सफलता का पैमाना अब केवल ग्रिड का विस्तार नहीं, बल्कि घर-घर बिजली की उपलब्धता है। उत्तर प्रदेश की यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि अंतिम छोर तक सेवा पहुंचाने के लक्ष्य को बड़े पैमाने पर कैसे धरातल पर उतारा गया।

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