लखनऊ में सार्वजनिक परिवहन को और अधिक सुगम बनाने के लिए मेट्रो नेटवर्क के विस्तार की प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है। राजधानी को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने के लिए वर्ष 2047 तक प्रमुख इलाकों को मेट्रो से जोड़ने की विस्तृत कार्ययोजना बनाई गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत 10 नए कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके लिए जमीन की तलाश शुरू हो चुकी है।
इस विस्तार योजना में लखनऊ के साथ-साथ पड़ोसी जिले बाराबंकी को भी शामिल किया गया है। परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए करीब 20 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है। इन नए मेट्रो रूटों के सुचारू संचालन के लिए डिपो का निर्माण अनिवार्य है, जिसके लिए मेट्रो लाइन के आसपास 1 से 2 किलोमीटर के दायरे में उपयुक्त स्थान चिह्नित किए जा रहे हैं।
इस कार्य की निगरानी के लिए एक उच्च-स्तरीय 5 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। समिति में अपर सचिव, वित्त नियंत्रक, मुख्य नगर नियोजक और मुख्य अभियंता जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जबकि अधिशासी अभियंता को इसका संयोजक बनाया गया है। यह समिति सरकारी और अन्य उपलब्ध भूखंडों की उपयोगिता और स्वामित्व का बारीकी से परीक्षण करेगी। वर्तमान में 3 अलग-अलग स्थानों पर जमीन का आकलन किया गया है।
प्रस्तावित कॉरिडोर की सूची में कल्ली पश्चिम से आईआईएम (45 किमी), राजाजीपुरम से आईआईएम (18.42 किमी), चारबाग से कल्ली पश्चिम (13 किमी), इंदिरा नगर से सीजी सिटी (7.7 किमी), इंदिरा नगर से अनोरा कला (9.27 किमी), सीसीएस एयरपोर्ट से बंथरा (11 किमी), मुंशीपुलिया से जानकीपुरम (6.29 किमी), सीजी सिटी से एयरपोर्ट (19.8 किमी), कल्ली पश्चिम से मोहनलालगंज (06 किमी) और अनोरा कला से बाराबंकी (14 किमी) तक के मार्ग शामिल हैं। डिपो के लिए ऐसी जमीन प्राथमिकता पर है जिसे मेट्रो लाइन से सरलता से जोड़ा जा सके, क्योंकि यहां ट्रेनों के रखरखाव, सफाई और मरम्मत का कार्य किया जाएगा।