उत्तर प्रदेश में अब बुजुर्गों को रहने के लिए सुरक्षित और सुविधायुक्त आशियाना आसानी से मिल सकेगा। योगी आदित्यनाथ सरकार राज्य में पहली बार वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक विशेष रेंटल हाउसिंग नीति तैयार करने जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को कम मासिक किराये पर भोजन, मनोरंजन और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं के साथ आवास उपलब्ध कराना है।
इस महत्वपूर्ण नीति को धरातल पर उतारने के लिए आवास एवं शहरी नियोजन विभाग ने कमर कस ली है। इसके लिए एक नौ सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता आवास सचिव करेंगे। इस समिति में लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, वाराणसी और मेरठ विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्षों के साथ-साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। आवास बंधु के निदेशक को इस समिति का संयोजक बनाया गया है।
वर्तमान में, देश के कुछ अन्य राज्यों जैसे हरियाणा और पंजाब में वरिष्ठ नागरिकों के लिए किराये के आवास की नीति पहले से मौजूद है, लेकिन उत्तर प्रदेश में अब तक ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी। इस नीति के अभाव में सीनियर लिविंग प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने में कठिनाई हो रही थी, क्योंकि निजी क्षेत्र इसमें विशेष रुचि नहीं दिखा रहा था। समिति अब दूसरे राज्यों की नीतियों का बारीकी से अध्ययन करेगी ताकि प्रदेश में भी एक बेहतर मॉडल तैयार किया जा सके।
सरकार का मानना है कि जैसे-जैसे वरिष्ठ नागरिकों की संख्या बढ़ रही है, उनके लिए सुरक्षित और किफायती आवास की जरूरत भी बढ़ती जा रही है। बढ़ती उम्र में ज्यादातर बुजुर्ग बड़ी पूंजी लगाकर नया घर खरीदने के बजाय किराये के सुरक्षित विकल्प को प्राथमिकता देते हैं। नई नीति के तहत सरकार आवास निर्माण में छूट देने, जल कर और गृह कर में राहत देने जैसे प्रावधानों पर विचार कर सकती है। इस पहल से न केवल बुजुर्गों को सम्मानजनक जीवन जीने में मदद मिलेगी, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और सुविधायुक्त वातावरण भी प्राप्त होगा। सरकार की ओर से गठित यह समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट और संस्तुतियां सौंपेगी, जिसके आधार पर अंतिम नीति का स्वरूप तय किया जाएगा।